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ज्यादातर व्यापारियों ने पैसे क्यों गंवाए?

ज्यादातर व्यापारियों ने पैसे क्यों गंवाए?
March 08 2018, 2:57 PM March 08 2018, 3:44 PM Umesh Kumar Ray

सवाल सरकार पर

मुमकिन ही नहीं बंदिशे आम आदमी के विचार पर और उन्हीं विचारों की अभिव्यक्ति है ब्लॉग "सवाल ज्यादातर व्यापारियों ने पैसे क्यों गंवाए? सरकार पर "। हिन्दुस्तान के आम आदमी के दिमाग में अक्सर उठने वाले सवालों और विचारों को अपने लेखन से प्रदर्शित करने की कोशिश मैं इस ब्लॉग में करता हूँ। मुझे पूरा यकीन है कि मेरी ये कोशिश आप सभी पाठकों को बेहद पसंद आयेगी । इस ब्लॉग पर आपको सरकार और राजनीति के अलावा हेल्थ, एजुकेशन ,मोटिवेशन, एंटरटेनमेंट, लव लाइफ पर ब्लॉगपोस्ट्स और काफी ब्लॉगपोस्ट्स कविता (POETRY) के रूप में भी समय -समय पर मिलते रहेंगे।

Why People Fail in Business | लोग Business में असफल क्यों हो जाते हैं

विशाल गुप्ता, लिखता हूँ वही, जो लगता है सही

Why People Fail in Business | लोग Business में असफल क्यों हो ज्यादातर व्यापारियों ने पैसे क्यों गंवाए? जाते हैं

Why People Fail in Business ?

आप सभी का बहुत-बहुत अभिवादन. आज चर्चा करते हैं कि लोग अगर कोई Business करते हैं तो उसमें असफल क्यों हो जाते हैं ? मैं बिना समय गंवाए और बिना फालतू की बातें बनाएं अपनी इस चर्चा को शुरू करता हूँ :

Business करने को लोग बहुत आसान समझते हैं

कुछ लोगों को लगता है कि Business में पैसा लगाया और ये चल पड़ेगा. ऐसा नही है. आपको उस Business की नॉलेज होनी भी जरूरी है. अगर ऐसा नही होगा तो आपका Business एक Successful Business कभी नही बनेगा. ये जरूर है कि अगर शुरुआत में Knowledge थोड़ी कम भी हो तो भी आपमें अपने Business में सीखने और आगे बढ़ने की Zeal तो होनी ही चाहिये.

सिर्फ हाथ में पैसा होने से ही Business नही होता है

आप पैसे से किसी दुकान या किसी बड़े Business का Set-up तो खड़ा कर सकते हैं लेकिन वो Set-up किसी Success में तब जाकर ही तब्दील होगा जब आपकी Knowledge और आपकी मेहनत उसमें मिलेगी. ये आपको समझ लेना चाहिये.

नौकरी Business से कहीं ज्यादा आसान काम है

मैं ऐसा इसलिये कह रहा हूँ कि अगर कोई व्यक्ति नौकरी करता है तो फिर उसे एक Single काम या फिर 2-4 काम ही करने पड़ते हैं. लेकिन एक व्यापारी को ग्राहक को भी संतुष्ट करना होता है और अपने खर्चे भी निकालने होते हैं. उसके बाद उसे अपनी आमदनी को भी सुनिश्चित करना पड़ता है. For Example एक बैंक में भर्ती होने में तो बहुत मेहनत लगती है लेकिन जब किसी बैंक में सरकारी नौकरी लग जाती है तो फिर आपको जो काम सौंपा जायेगा, केवल वो ही आपको करना होगा. Bank का Business कैसा चल रह है, Up है या Down है, ये सोचना आपका काम नही है लेकिन अगर आप Businessman हैं तो फिर ये सब जिम्मेदारी भी आपकी है. मैं यहाँ किसी Bank Executive को छोटा करके नही आंक रहा हूँ, बस केवल इतना समझाने की कोशिश कर रहा हूँ कि नौकरी छोड़कर Business में महज इसलिये मत आईये कि आपको नौकरी से ज्यादा आसान Business करना लगता है. हाँ, Business करने का सच में मन है तो फिर बेझिझक आ जाइये. बस आपको अपने मन में उत्साह और उर्जा की कमी नही होने देनी है. अगर ये दोनों चीजें आपमें बरक़रार रही तो फिर आपकी सफलता कोई नही रोक सकता है.

Business में शुरू में काफी मेहनत करनी पड़ती है

Business केवल चला हुआ ही अच्छा लगता है. जब हम किसी Business को बहुत अच्छा चलते देखते हैं तो हम कहते हैं कि अरे वाह ! ये तो बहुत आसान है. लेकिन जब उसको शुरू करते हैं तो कड़ी मेहनत करनी ही पड़ती है. ये नौकरी की तरह नही है कि Duty की और घर आ गए. ये आपकी जिम्मेदारी पर चलने वाला काम है. आपको इसे गंभीरता से करना ही होगा. तब जाकर ही आपको Success मिल पायेगी.

Business नौकरी की तरह Time देने वाली चीज नही है

जैसा कि मैंने पहले कहा कि Business नौकरी की तरह की चीज नही है कि अपनी Duty का Time खत्म किया और घर आ गए. एक फिल्म है अमिताभ बच्चन की “त्रिशूल” जिसमें अमिताभ बच्चन का एक डायलॉग है कि “ऑफिस आने का टाइम सुबह 10 बजे है और जाने का कोई टाइम नही है”. मैंने ये डायलॉग इसलिये बताया क्योंकि फ़िल्में समाज का आईना होती है. इसलिये ये सच है कि Business में Time पूरा नही करना पड़ता बल्कि Time देना पड़ता है. ये नौकरी की तरह Fixed Time Working करने वाला मामला नही है. इसमें समय देना पड़ता है और उर्जा और उत्साह बनाये रखना पड़ता है. तब जाकर ही Business सफलता तक पहुँचता है.

तो दोस्तों ये मैंने अपने विचार आपसे शेयर किये कि Why People Fail i n Business ? अगर सचमुच आपको मेरा लिखा ये Article पसन्द आया हो तो कृपया इसे अपने Social Media Platforms जैसे कि Facebook, Twitter, Instagram, Pinterest आदि पर जरूर Share करें और लगातार पढ़ते रहिये मेरा ये ब्लॉग “सवाल सरकार पर”.

हैरान करने वाली,लेकिन सच: शेयर बाजार (Share Bazar) में 90% लोग अपना पैसा गंवा देते हैं।

शेयर और शेयर बाजार (Share Bazar) को लेकर एक बहुत पुराना, लेकिन लोकप्रिय चुटकुला है। अगर शेयर बाजार (Share Bazar) में आपका पैसा डूब गया है और आप दुखी हैं, तो परेशान मत होइये। आप अपने जान-पहचान वाले किसी ऐसे व्यक्ति से मिलिये, जिसने शेयर बाजार में पैसा गंवाया है, तो आप अच्छा महसूस करेंगे, क्योंकि आपका नुकसान कम हुआ है।

हालांकि यह मजाक दशकों से चल रहा है, लेकिन आज भी सही है। आज भी ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो कि हर दिन शेयर बाजार (Share Bazar) में पैसे गंवाते हैं। एक लोकप्रिय अनुमान के अनुसार, शेयर बाजार (Share Bazar) में 90% लोग अपना पैसा गंवा देते हैं। इनमें नए और अनुभवी निवेशक भी शामिल हैं।

Table of Contents

क्या, ये हैरान करने वाली बात नहीं है? लेकिन यह सच है शेयर बाजार (Share Bazar) में 90% लोग अपना पैसा गंवा देते हैं।

शेयर बाजार (Share Bazar) में निवेशकों का पैसा क्यों डूबता है, इसके बहुत सारे कारण हैं। आइये उनमें से सबसे महत्वपूर्ण कुछ कारणों के बारे में हम चर्चा करते हैं।

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1. अफवाह और स्टॉक टिप्स के आधार पर शेयर बाजार (Share Bazar) में निवेश करना

क्या आपके पास इस प्रकार के एसएमएस आते हैं- “XYZ कंपनी के 1000 शेयर रु. XX में खरीदें”,“इस कंपनी में एक महीने में काफी तेजी आएगी,क्योंकि ABC कंपनी उसको खरीदने वाली है” या “XYZ के शेयर बड़े पैमाने पर खरीदें, क्योंकि यह कंपनी ABC कंपनी के प्रोडक्ट या सर्विस का विशेष वितरण अधिकार खरीदने वाली है। इसलिये इसे अभी रु.XX की कम कीमत पर खरीदें और अगले कुछ समय में रु.XXX की अधिक कीमत पर बेच दीजिए”?

इस तरह के संदेश धोखेबाजों द्वारा जानबूझकर थोक एसएमएस के माध्यम से भेजे जाते हैं। शेयर बाजार (Share Bazar) कार्टेल के रूप में काम करने वाले ऐसे धोखेबाज सीधे-साधे निवेशकों को वैसे शेयरों में फंसाना चाहते हैं, जिनका कोई ठोस आधार नहीं होता है।

बहुत सारे निवेशक, खासकर नए, बिना सोचे-समझे वैसे किसी व्यक्ति के शेयर टिप्स के चक्कर में फंस जाते हैं, जो खुद ही इसके लिए किसी दूसरे के सलाह पर निर्भर रहता है। और अगर मान लिया किसी के लिए आज की डिजिटल दुनिया में दोस्तों/रिश्तेदारों/सहयोगियों के स्टॉक टिप्स के पर्याप्त नहीं हों। तो, ऐसे में सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और बिजनेस न्यूज चैनलों पर स्टॉक टिप्स सहित सूचनाओं की लगातार बमबारी हो रही है। स्टॉक खरीदने के 3 गलत कारणों के बारे में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

हम बिजनेस न्यूज चैनलों पर कई खुद को एक्सपर्ट बताने वाले या एंकर को अगले कुछ पलों में अच्छे पैसे कमाने की उम्मीद में स्टॉक खरीदने या बेचने की सलाह देते हुए देख सकते हैं। लेकिन बदकिस्मती से, यह सीधे-साधे निवेशकों के लिए एक खतरनाक जाल बना जाता है। सीधे-साधे निवेशक अक्सर स्टॉक टिप्स की इस बमबारी को सही मान लेते हैं और असलियत को जाने बिना ही इसके आधार पर निवेश कर देते हैं।

स्टॉक टिप्स के ज्यादातर व्यापारियों ने पैसे क्यों गंवाए? नुकसान ज्यादातर व्यापारियों ने पैसे क्यों गंवाए? को इंफीबीम एवेन्यूज के उदाहरण से अच्छी तरह से समझा जा सकता है। 28 सितंबर 2018 को इंफीबीम एवेन्यूज (Infibeam Avenues) का स्टॉक लगभग 71% गिरकर करीब रु.197 से करीब रु.50 पर आ गया। जानते हैं इस गिरावट की वजह क्या थी? किसी व्यापारी समूह में फैलाया गया एक व्हाट्सअप संदेश, जिसके बाद निवेशकों में घबराहट फैल गई और वे धड़ाधड़ शेयर बेचते चले गए।

नुकसान इतना ज्यादा हो गया था कि कंपनी के एमडी को इस संबंध में सफाई देनी पड़ गई। उसके बयान में कहा गया कि कुछ व्हाट्सअप मैसेज की वजह से बाजार के भागीदारों और निवेशकों में बहुत ज्यादा घबराहट फैल गई। एमडी ने इस मैसेज को गलत और कंपनी को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने वाली भावना से प्रेरित बताया।

ऐसा कहा जाता है कि “बुरी खबर आमतौर पर किसी और के लिए अच्छी खबर होती है”। इक्विटीज से जुड़ी खबरों पर यह 100% लागू होता है। अक्सर, कुछ संस्थाओं द्वारा मीडिया के माध्यम से जानबूझकर मनगढ़ंत खबर के रूप में अफवाहें फैलायी जाती है। इसका लक्ष्य होता है निवेशकों में यह गलत भरोसा दिलाना कि इस खास समाचार से वे दूसरों से आगे रहकर मुनाफा कमा सकते हैं।

इसको असल में घटी एक घटना से समझिये। ग्रेफाइट इंडिया (Graphite India) का स्टॉक सितंबर 2018 में अधिकांश बिजनेस समाचार चैनलों और वेबसाइटों पर एक हॉट पिक था। इस कंपनी के शेयर में रु.400 का लक्ष्य दिया गया था,जबकि उस समय उसकी बाजार कीमत रु.100 थी। हालांकि, चार महीने बाद, उन्हीं बिजनेस न्यूज चैनलों और वेबसाइटों ने ग्रेफाइट इंडिया के शेयरों को रु.53 के लक्ष्य के साथ बेचने की सलाह दी। फिलहाल यह शेयर रु.181 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

अगर किसी निवेशक ने बिजनेस न्यूज चैनलों और वेबसाइटों द्वारा दी गई खरीद की सिफारिशों के आधार पर ग्रेफाइट इंडिया का स्टॉक खरीदा होता तो उसे कितना नुकसान होता, क्या आप इस बात की कल्पना कर सकते हैं?

ज्यादातर व्यापारियों ने पैसे क्यों गंवाए?

बेटी ने हादसे में दो हाथ गंवाए तो मदद के लिए जुट गए हजार हाथ | MP NEWS

बेटी ने हादसे में दो हाथ गंवाए तो मदद के लिए जुट गए हजार हाथ | MP NEWS

Madhya Pradesh News एक हादसे में 10 साल की बेटी के दोनों हाथ कट गए तो पूरा गांव मदद के लिए आगे आ गया। बच्ची के परिवारजनों की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है। इलाज के लिए भी पैसे नहीं थे। ग्रामीणों में चंदा करके बच्ची का इलाज कराया। अब उसके पालन पोषण व जीवन यापन का पूरा जिम्मा ग्रामीणों ने ले लिया है।

सिवनी मालवा में कक्षा 5वी की छात्रा कीर्ति राजपूत 5 जनवरी को शाम 6 बजे स्कूल से लौटकर खाना खाने के बाद छत पर खेलने चली गई । घर के ऊपर से 11 केवी के तार की लाइन गई हुई है । कीर्ति ने खेलते. खेलते अचानक लोहे की एक राड उठा ली। जैसे ही कीर्ति ने राड उठाई। राड ऊपर तारों से जाकर टकरा गई और कीर्ति को जोरदार करंट लगा। दोनों हाथ बुरी तरह झुलस गए। परिजन तत्काल सरकारी अस्पताल ले गए।

जहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला चिकित्सालय रेफर किया। परिजनों ने हालात को देखते हुए तत्काल इंदौर निजी अस्पताल ले गए। कीर्ति के दोनों हाथ काटने पड़े। 10 साल की कीर्ति राजपूत के कठिन समय में सिवनी मालवा के ग्रामीण एकजुट हो गए। जय रणजीत हनुमान मंदिर परिवार द्वारा जन सहयोग के लिए एक पहल के बाद प्रशासनिक अधिकारी ए जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, व्यापारी, आमजन सब एकजुट हो गए। जैसे कीर्ति उन्हें के परिवार की बिटिया हो।

प्रतिभाशाली कीर्ति राजपूत के लिए हर व्यक्ति भाई, पिता, चाचा के रूप में खड़ा हुआ है। जय हनुमान रणजीत मंदिर समिति की अगुवाई में ग्रामीणों कीर्ति के इलाज पर अब तक खर्च हुए करीब दो लाख का भुगतान कर दिया। इसके साथ ही कीर्ति को जीवनभर मदद करने का वादा किया है। अभी तक जिन लोगों ने सहयोग दिया है। एसडीएम रवि शंकर रायए तहसील दिनेश सावले ने कीर्ति का गरीबी रेखा का कार्ड बनवाया है।

पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष राजेंद्र जैन, अनिल कलवानी, रणधीर रघुवंशी, श्याम खाटू परिवार शिवनी बानापुरा के सदस्यों, सर्राफा व्यापारी संघ, किराना व्यापारी संघ, सांसद प्रतिनिधि अरविंद सोहरोत सहित अनेक लोग अपने स्तर पर सहयोग दे रहे हैं।

कीर्ति का अब भी अस्पताल में इलाज चल रहा है। उसे अपने दोनों हाथ कटने का दुख तो हैए लेकिन गांव वालों के हजार हाथों के जुड़ने की खुशी भी है। कीर्ति का कहना है कि जिस तरह मेरे गांव के लोगों ने मेरी मदद की है उससे अपने हाथ नहीं होने की कमी महसूस नहीं हो रही।

कीर्ति के पिता गुरवीर सिंह कपड़े की छोटी सी कपड़े की दुकान है। उनकी छह बेटियां हैं। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। गुरवीर का कहना है कि यदि गांव के लोग मदद नहीं करते तो बेटी का बचना मुश्किल था। जिस तरह ग्रामवासी मदद कर रहे हैं उनका जितना आभार जताया जाए कम है।

हाजी मस्तान: कभी किसी की हत्या न करने वाला डॉन!

March 08 2018, 2:57 PM March 08 2018, 3:44 PM Umesh Kumar Ray

ये तब की बात है, जब अंग्रेजों ने सात द्वीपोंवाले मुंबई (पहले बॉम्बे) शहर को व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित करना शुरू कर दिया था.

टेक्सटाइल से लेकर तमाम फैक्टरियां मुंबई में उगने लगी थीं. मुंबई के द्वीपों से होकर विदेशों से सामान की आमदरफ्त तेज थी.

देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग रोजगार के लिए मुंबई आने लगे थे.

उसी दौर में तमिलनाडु से भी 8 ज्यादातर व्यापारियों ने पैसे क्यों गंवाए? साल का एक सहमा हुआ सीधा-सादा बच्चा अपने पिता की अंगुली पकड़कर मुंबई शहर में दाखिल हुआ था. अपनी मासूम-सी आंखों में अमीर बनने के सतरंगी सपने लेकर.

मुंबई में वह साइकिल के पंक्चर बनाने से लेकर कूली तक का काम करता है. …और एक दिन वह मुंबई अंडरवर्ल्ड के सबसे बड़े डॉन का खिताब हासिल कर लेता है.

जी, हां! हम बात कर रहे हैं आकिब हुसैन उर्फ हाजी मस्तान (हाजी मस्तान नाम बाद में मिला. इसकी कहानी इस लेख के बीच में मिलेगी) उर्फ हाजी हुसैन उर्फ बावा उर्फ सुल्तान की.

…तो आइये हम जानते हैं हाजी मस्तान की जिंदगी के दिलचस्प किस्से को-

तमिलनाडु में पैदाइश, मुंबई पलायन

1 मार्च 1926 को तमिलनाडु के पनाईकुलम में हाजी मस्तान का जन्म हुआ. चूंकि उसका परिवार आर्थिक तंगी में दिन गुजार रहा था, इसलिए उसके लिए पढ़ाई-लिखाई मुमकिन न हो सकी.

साल था 1934. मुंबई तेजी से देश की व्यापारिक राजधानी बन रहा था. भारत के हर क्षेत्र से लोग मुंबई का रुख कर रहे थे. उसी समय पनाईकुलम से अपने पिता हैदर मिर्जा के साथ हाजी मस्तान भी मुंबई आ गया.

मुंबई के क्रेफोर्ड रोड में दोनों साइकिल रिपेयरिंग का काम करने लगे. दिनभर वहां काम करने पर भी आमदनी बहुत कम होती. जिससे परिवार का गुजारा मुश्किल से हो पा रहा था. फिर भी दोनों ने 10 साल तक वहां काम किया. लेकिन, इन दस सालों में हाजी मस्तान ने अपने भीतर कुलांचे भर रहे सतरंगी सपनों को मुरझाने नहीं दिया.

यह सन 1944 की बात होगी. उसने किसी तरह 5 रुपये दिहारी पर बॉम्बे डॉक में माल ढुलाई की नौकरी पा ली.

बस यहीं से हाजी मस्तान के गैंगस्टर बनने का सफर शुरू हो गया.

अपराध की काली दुनिया में रखा कदम

बॉम्बे डॉक में काम करते हुए हाजी मस्तान वहां के कर्मचारियों व व्यापारियों को खूब खुश रखता था. उन दिनों व्यापारी चोरी-छिपे विदेशी ट्रांजिस्टर, सोना-चांदी व विदेशी घड़ियों की तस्करी करते थे.

मस्तान ने इनका सामान डॉक से सुरक्षित बाहर निकालना शुरू कर दिया. इसके बदले उसे अच्छा पैसा मिलता था. मस्तान के बारे में कहा जाता है कि वह काला धंधा भी बड़ी ईमानदारी से करता था.

उसकी ईमानदारी का एक किस्सा खासा मशहूर है. इसके तहत एक बार एक व्यापारी हाजी मस्तान की मदद से सोने की तस्करी करना चाहता था. उसने हाजी मस्तान को सोने के कुछ बिस्कुट दे दिए और खुद भी छिपाकर डॉक से बाहर निकलने लगा.

हाजी मस्तान तो वहां से सुरक्षित बाहर निकल गया, लेकिन व्यापारी गिरफ्तार हो गया. उसे 4 साल की जेल हुई. आगे सजा काटने के बाद जब वह जेल से बाहर निकला, तो हाजी मस्तान ने पूरा सोना उसे वापस कर दिया.

बहरहाल, सन 44 से लेकर 50 तक हाजी ने व्यापारियों के लिए स्मगलिंग का सामान डॉक से बाहर निकालने का काम किया. इसी दौरान उसकी मुलाकात दमन के स्मगलर सुक्कुर नारायण बखिया से हो गयी.

…और यहीं से वह काले धंधे की काली दुनिया में चमचमाने लगा.

हां, और एक बात. उस दौर में मुंबई अडरवर्ल्ड में मार-काट नहीं होती थी. हाजी मस्तान के बारे में तो यह तक कहा जाता है कि उसने कभी किसी की हत्या नहीं करायी थी! मुंबई अंडरवर्ल्ड में खून-खराबे का दौर 70 के दशक के बाद शुरू हुआ था. उसकी एक अलग कहानी है, जिसका जिक्र फिर कभी होगा.

हुस्न-ओ- इश्क की गिरफ्त में

कहते हैं कि कोई भी शख्स कितना भी पत्थर-दिल और क्रूर क्यों न हो, उसके दिल के किसी कोने में बेशुमार मोहब्बत भी होती है.

हाजी मस्तान भी अपवाद नहीं था. सन 44 में हाजी मस्तान ने बॉम्बे डॉक में माल ढुलाई का काम शुरू किया था. इससे दो साल पहले यानी सन् 1942 में महज 9 साल की उम्र में मधुबाला की बॉलीवुड में इंट्री हुई. फिल्म थी ‘बसंत’. इसके बाद उन्हें एक के बाद एक फिल्में मिलती गयीं और वह कामयाबी की बुलंदियों को छूती गयीं.

बेहद खूबसूरत मधुबाला के दीवानों की कमी नहीं थी. इन दीवानों में हाजी मस्तान भी था, लेकिन उसकी मोहब्बत एकतरफा थी. उसने कभी मधुबाला के सामने अपना इश्क जाहिर नहीं किया.

बस, चुपचाप इश्क का तसव्वुर करता रहा.

सत्तर के दशक के आखिरी वक्त में उसने हिम्मत जुटायी भी, लेकिन वह कुछ कह पाता कि मधुबाला चुपके से दुनिया-ए-फानी को अलविदा कह गयीं.

मधुबाला की मौत से हाजी मस्तान को बड़ा सदमा लगा. ऐसे में मरहम बनकर आयी सोना. सोना का पूरा नाम था शाहजहां बेगम. सोना बॉलीवुड में ब्रेक पाने के लिए स्ट्रगल कर रही थी. संयोग से उसे हाजी मस्तान के प्रोडक्शन में बननेवाली फिल्म में काम करने का मौका मिल गया.

उसके नैन-नक्श बिल्कुल मधुबाला जैसे थे. हंसी भी मधुबाला की तरह ही थी. हाजी मस्तान को एक नजर में ही मधुबाला-सी दिखने वाली सोना से इश्क हो गया और दोनों ने बिना एक पल गंवाए शादी कर ली.

Haji Mastan with His Love Sona (Pic: Dailymotion)

इमरजेंसी में गिरफ्तारी और…

26 जून 1975 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इशारे पर देश में आपातकाल लागू हुआ था. तमाम अपराधियों को एहतियातन जेलों में डाला जा रहा था. इसी क्रम में हाजी मस्तान को भी जेल में डाल दिया गया.

जेल में उसने करीब 18 महीने बिताये. इसी दौरान वह जय प्रकाश नारायण के संघर्ष व उनकी राजनीति से रूबरू हुआ और आखिरकार उसने अपराध की दुनिया को अलविदा कहने का मन बना लिया.

जेल से छूटने के बाद वह हज करने चला गया. हज कर लौटा, तो उसे ‘हाजी मस्तान’ नाम मिला. हज से लौटने पर हाजी मस्तान ने स्मगलिंग का धंधा छोड़कर वैध कामों में पैसे लगाने लगा. साथ ही सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना शुरू कर दिया.

माना जाता है कि जेपी से ही प्रेरणा लेकर उसने 1985 के आसपास ‘दलित मुस्लिम सुरक्षा महासंघ’ नाम के राजनीतिक संगठन की स्थापना कर डाली थी. इस तरह वह राजनीति के सफर पर चला तो, लेकिन कोई बड़ा नाम नहीं कमा सका.

हां, मुंबई के गरीबों खासकर दलितों व मुसलमानों के लिए वह मसीहा बनकर जरूर उभरा. अंतत: 9 मई 1994 को उसके सफर का अंत हो गया.

Ajay Devgan as a Haji Mastan in Once upon a Time Film (Pic: BhindiBazaar)

बाद में उनकी जिंदगी पर ‘वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई’ नाम की फिल्म बनीं, जिसमें अजय देवगन ने उनका किरदार निभाया था.

MIS Account: शादी के बाद जीरो रिस्क पर खुलवाएं ये खाता, हर महीने गारंटी से मिलेंगे 4950 रुपये

शादी के बाद जीरो रिस्क पर खुलवाएं ये खाता, हर महीने गारंटी से मिलेंगे 4950 रुपये

नई दिल्ली :- पिछले कुछ सालों से Share Market में आई तेजी ने कई नए निवेशकों को निवेश के लिए आकर्षित किया है. ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों को ही नहीं, व्यापारियों को भी काफी फायदा हो रहा है, लेकिन कई लोग जो बाजार में नए हैं उनके पास बचाने के लिए ज्यादा रुपये नहीं हैं. ऐसे में वे लोग कम कीमत वाले शेयरों में पैसा लगाना चाहते हैं. इसके लिए आप एक ऐसा निवेश विकल्प चुनें जहां आपका पैसा पूरी तरह से सुरक्षित हो और आपको Guaranteed Return भी मिले. अगर आप किसी ऐसी योजना की तलाश में है तो ये खबर आपके लिए बहुत जरूरी हो सकती है.

इस योजना में करें निवेश, पाए लाभ ही लाभ

डाकघर मासिक आय योजना (Post Office MIS) एक ऐसी लाजवाब छोटी बचत योजना है, जिसमें आपको सिर्फ एक बार Invest करना होता है. आपको बता दें इस योजना में Single और Joint दोनों टाईप का Account खोला जा सकता है. अकाउंट Minimum 1,000 रुपये के निवेश के साथ खोला जा सकता है. आप एक खाते में Maximum 4.5 लाख रुपये का निवेश कर सकते हैं. वहीं, Joint Account में निवेश की सीमा 9 लाख रुपये है. MIS खाते की Maturity Duration 5 वर्ष है. यानी पांच साल बाद आपको Guaranteed Monthly Income मिलने लगेगी.

इतने प्रतिशत ब्याज मिलेगा

आप जानते हैं कि कोई भी भारतीय नागरिक डाकघर Post Office MIS Scheme में निवेश कर सकता है. इंडिया पोस्ट की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक मासिक आय योजना पर सालाना 6.6% ब्याज मिल रहा है. इसका भुगतान हर महीने किया जाता है. योजना के नियमों के अनुसार, ‘अगर एक साल से तीन साल के बीच पैसा निकाला जाता है, तो जमा राशि का 2% वापस कर दिया जाएगा. अगर आप खाता खोलने के 3 साल बाद मैच्योरिटी से पहले किसी भी समय पैसा निकालते हैं, तो आपकी जमा राशि का 1% काटकर वापस कर दिया जाएगा.

इस योजना में Account खुलवाने की है कुछ शर्तें

इसके लिए आपके पास I’D Card Proof के लिए Aadhar Card या Passport या Voter Card या Driving License आदि होना जरूरी है.

इसके लिए आपको 2 Passport Size Photo उपलब्ध कराने होंगे.

इस Documents को लेकर आप नजदीकी डाकघर में जाकर डाकघर मासिक आय योजना का Form भर सकते हैं.

आप इसे Online भी Download कर सकते हैं.

फिर उसके बाद Form भरना और उसमें अपने Nominee का नाम देना होगा.

इस खाता को खोलने के लिए शुरुआत में 1000 रुपये नकद या चेक के जरिए जमा कराने होंगे.

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