क्रिप्टो रोबोट

Stock Market में ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है

Stock Market में ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है
Scalping Trading क्या है – Scalping Trading In Hindi

स्टॉक कितने प्रकार के होते है?

वह स्टॉक जो हाई पीई रेशो पर ट्रेंड होते है और स्टॉक की वैल्यू तेज गति से बढ़ती है वह ग्रोथ स्टॉक होते है। ग्रोथ स्टॉक वाली कंपनी अपने शेयरधारको को डिविडेंड नही देती है क्योकी ऐसा माना जाता है कि ग्रोथ स्टॉक वाली कंपनी के पास भविष्य में अधिक अवसर होते है।

  • वैल्यू स्टॉक (Value stock)

वैल्यू स्टॉक वह होते है जो लॉ पीई रेशो पर ट्रेंड होते है तथा प्राइस बुक वैल्यू भी कम होता है उन्हें वैल्यू स्टॉक कहते है। वैल्यू स्टॉक वाली कंपनी के पास भविष्य में अधिक अवसर नही होते इसलिए इन स्टॉक का डिविडेंड रेशो अधिक होता है।

  • डिविडेंड स्टॉक (Dividend stock)

डिविडेंड स्टॉक जब कंपनी अपने प्रॉफिट में से अपने शेयरधारको को कुछ हिस्सा देती है उन शेयर को डिविडेंड स्टॉक कहते है। लेकिन डिविडेंड केवल प्रॉफिट होने पर ही मिलता है यह आवश्यक नही है कि सभी कंपनी डिविडेंड देती है तथा प्रत्येक बार देती है डिविडेंड देना कंपनी पर निर्भर करता है।

जैसे- किसी के पास X Ltd के 100 शेयर है और कंपनी प्रत्येक शेयर पर 4 रुपये का डिविडेंड देने के लिए कहती है तो डिविडेंड 4×100= 400₹

  • ब्लू चिप स्टॉक (Bluechip stock)

ब्लू चिप स्टॉक उन कंपनी के स्टॉक होते है जो अपने सेक्टर में लीडर होती है और इनकी लार्ज कैपिटल होती है। ब्लू चिप स्टॉक भरोसेमंद और इन्वेस्टर की पहली पसंद होते है। क्योकि यह स्टॉक नियमित रूप से प्रॉफिट कमाने में सक्षम है। यदि ब्लू चिप स्टॉक में अधिक समय के लिए निवेश किया जाए तो यह अधिक लाभकारी हो सकता है।

  • पैनी स्टॉक (Penny stock)

Penny का अर्थ है- पैसे । वह स्टॉक जिनकी वैल्यू बहुत कम (यानी 1 रुपये से 25 रुपये तक) होती है और मार्किट कैपिटल 100 करोड़ से अधिक नही होती है उन्हें पैनी स्टॉक कहते है। पैनी स्टॉक में निवेश करना सुरक्षित नही माना जाता है यह स्टॉक में बहुत जोखिम होता है।

उम्मीद करते है कि आपको 'स्टॉक कितने प्रकार के होते है, Types of stock in hindi' के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त हुई होगी। यदि आपको यह जानकारी पसंद आई है तो इसे शेयर जरूर करे।

स्टॉक कितने प्रकार के होते हैं (How many types of stocks are there)

इस तरह की कंपनी लगातार अपने प्रॉफिट को मैनेज करने में सफल होती है इस तरह की कंपनी में Dividend स्टॉक कम होता है या नहीं होता है इस तरह की कंपनी अपने स्टॉक होल्डर को Dividend देगी या नहीं देगी यह निश्चित नहीं होता है और इस तरह के स्टॉक सबसे ज्यादा रिस्की होते हैं मतलब Growth स्टॉक में सबसे ज्यादा रिस्क होता है

Types of Stock

2. मूल्य स्टॉक (Value stock) = वैल्यू स्टॉक में डिस्काउंट अवेलेबल होते हैं जो प्राइस उसका निश्चित होता है उसमें भी वह डिस्काउंट कर देते हैं और कभी कभी Value स्टॉप पर कंपनी अपने प्रॉफिट पर डिस्काउंट भी देती है मतलब अपने प्रॉफिट का कुछ हिस्सा अपने शेयर होल्डर को Dividend के रूप में बांट देती है उसे Value स्टॉक कहते हैं

3.लाभांश स्टॉक (dividend stock) = कंपनी प्रॉफिट अमाउंट जनरेट करते हैं कंपनी अपने प्रॉफिट का कुल हिस्से में से कुछ हिस्सा अपने शेयर होल्डर में बांट देती है

इस तरह के स्ट्रोक मैं कंपनी Dividend देती ही देती है जिसे हम Dividend स्टॉक कहते हैं

4.चक्रीय स्टॉक (Cyclical stock) = Cyclical कंपनी का प्रॉफिट Economic के साथ लिंक होता है अगर Economic अच्छा होगा तो कंपनी को प्रॉफिट भी अच्छा होगा और अगर Economic खराब होगा तो कंपनी को प्रॉफिट नहीं होगा Cyclical स्टॉक इसी से लिंक होता है

इसके उदाहरण जैसे :- सीमेंट, आयल, मेटल्स, गैस आदि

अन्य दो प्रकार और भी है स्टॉक के

1.ब्लू चिप स्टॉक (Bluechip stock)

ब्लू चिप स्टॉक उन कंपनी के स्टॉक होते है जो अपने सेक्टर में लीडर होती है और इनकी लार्ज कैपिटल होती है। ब्लू चिप स्टॉक भरोसेमंद और इन्वेस्टर की पहली पसंद होते है। क्योकि यह स्टॉक नियमित रूप से प्रॉफिट कमाने में सक्षम है। यदि ब्लू चिप स्टॉक में अधिक समय के लिए निवेश किया जाए तो यह अधिक लाभकारी हो सकता है।

2.पैनी स्टॉक (Penny stock)

Penny का अर्थ है- पैसे । वह स्टॉक जिनकी वैल्यू बहुत कम (यानी 1 रुपये से 25 रुपये तक) होती है और मार्किट कैपिटल 100 करोड़ से अधिक नही होती है उन्हें पैनी स्टॉक कहते है। पैनी स्टॉक में निवेश करना सुरक्षित नही माना जाता है यह स्टॉक में बहुत जोखिम होता है।

Scalping Trading क्या है ? Scalping Trading कैसे करें – Scalping Trading In Hindi

Scalping Trading क्या है ? Scalping Trading कैसे करें – Scalping Trading In Hindi, Scalping Trading Kya Hai In Hindi | What Is Scalping Trading In Hindi, नमस्कार दोस्तों आज में आपको बताऊंगा की स्काल्पिंग ट्रेडिंग क्या होती है (Scalping Meaning In Hindi) इसके अलावा में आपको यह भी बताऊंगा की क्या आपको स्कल्पिंग ट्रेडिंग करनी चाहिए या नहीं तो चलिए जानते है कि Scalping Kya Hai.

Scalping Trading क्या है - Scalping Trading In Hindi

Scalping Trading क्या है – Scalping Trading In Hindi

Scalping Trading क्या है – Scalping Trading In Hindi

Scalping Trading के अंदर Stock Market में ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है किसी शेयर को कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनटों तक रखकर बेच दिया जाता है इसमें मार्किट में जो छोटे-छोटे मूवमेंट आते है उनका फायदा उठाया जाता है और मार्केट के बंद होने तक बहुत सारे ट्रेड किये जाते है।

Scalping Trading एक Trend Following Strategy है जिस दिशा में ट्रेंड हो उसी दिशा में ट्रेड लिए जाते है Scalping में बड़ा पैसा निवेश किया जाता है और छोटा-छोटा प्रॉफिट निकाला जाता है

उदाहरण: मान लीजिये कोई शेयर है जिसकी Current Price 100 रुपये है और उसके 10000 शेयर आपने खरीद रखे है अब जैसे ही वो शेयर 100 रुपये से बढ़ कर 100.50 पैसे हो जाता है तो आप वह 10000 शेयर बेच देते है तो इससे आपको 5000 रुपये का प्रॉफिट होगा इसे ही Scalping Trading कहते है।

Scalping Trading क्या है :- Scalping Trading Kya Hai In Hindi | What Is Scalping Trading In Hindi

Scalping trading Kya hai in Hindi – स्काल्पिंग ट्रेडिंग के अंतर्गत शेयर मार्केट में आने वाले छोटे-छोटे उतार-चढ़ाव के बीच में शेयर को खरीदना और बेचना और उनसे मुनाफा कमाना शामिल होता है अर्थात शेयर मार्केट में थोड़ा बहुत उतार-चढ़ाव आता है तो उनका पर्याप्त रूप से फायदा उठाया जाता है 1 दिन में बहुत सारे ट्रेड किए जाते हैं और मुनाफा कमाया जाता है

शेयर मार्केट में मार्केट ओपन होते ही कम से कम रुपया में अधिक से अधिक शेयर खरीदना और उनके प्राइस बढ़ जाने पर हाथों-हाथ उन्हें भेज देना और उनसे मुनाफा कमाना स्काल्पिंग ट्रेडिंग कहलाता है

Scalping trading meaning in Hindi :- Scalping Trading meaning

स्काल्पिंग ट्रेडिंग का हिंदी मीनिंग अर्थात हिंदी मतलब Scalping trading meaning in Hindi – सामान्य शब्दों में इस टाइपिंग ट्रेडिंग का हिंदी अर्थ “ कालाबाजारी ” से होता है

सामान्य शब्दों में कहा जाए तो ट्रेडिंग की सामान्य पद्धति से हटकर ट्रेडिंग करने को स्काल्पिंग ट्रेडिंग कहा जाता है

Scalping trading कैसे करें :- Scalping trading kaise kare

शेयर मार्केट में टाइपिंग ट्रेडिंग करके बड़ी आसानी से ज्यादा ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है आज के ज्यादातर ट्रेडर्स स्काल्पिंग ट्रेडिंग करके अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं

स्काल्पिंग ट्रेडिंग कोई आसान काम नहीं होता है इसमें आपको काफी मेहनत लगती है और हमें अच्छा एक्सपीरियंस चाहिए और यदि आप ट्रेडिंग में नए-नए हो तो एक बार स्काल्पिंग ट्रेडिंग ना करें

स्काल्पिंग ट्रेडिंग करने के लिए आपको किसी एक्सपीरियंस बंदे की या व्यक्ति की आवश्यकता होगी आपको स्काल्पिंग ट्रेडिंग करने के लिए अपनी स्ट्रेटजी बनानी होगी जिसके द्वारा आप ट्रेडिंग पूरी कर सकें

Scalping trading strategy :- Scalping trading strategy in Hindi

स्काल्पिंग ट्रेडिंग करना थोड़ा बहुत माथापच्ची वाला काम है इसमें आपको थोड़ा बहुत अनुभव और किसी अच्छे व्यक्ति की सलाह की आवश्यकता होगी जो कि शेयर मार्केट की अच्छी जानकारी रखता हो

  • सर्वप्रथम आपको ऐसे कंपनी के शेयर स्टॉक को चुनना है जिसमें सर्वाधिक उतार-चढ़ाव या उछाल आता हो जिसके द्वारा आप स्पष्ट रूप से मुनाफा कमा सकें
  • अपने ट्रेडिंग प्लेटफार्म यह ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर के अंदर उस कंपनी के शेयर उपलब्ध होने चाहिए
  • क्योंकि ऐसे शेयर जिनके भाव में बहुत ही ज्यादा उतार-चढ़ाव आता है शेयर में ऐसे मूवमेंट के अंतर्गत हम शेयर को खरीद कर और बेचकर
  • स्काल्पिंग ट्रेडिंग के माध्यम से एक बार में कम से कम रूपों में अधिक से अधिक शेयर खरीद कर और इन्हें उच्च कीमत पर बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं
  • चलिए स्काल्पिंग ट्रेडिंग स्ट्रेटजी को एक उदाहरण के माध्यम से जानते हैं

Scalping trading :- Scalping trading in Hindi

मान लीजिए आपने जिस शेयर का चुनाव किया है उसकी कीमत में हर 15 मिनट के अंदर ₹1 से लेकर ₹1.5 तक का तक का उतार-चढ़ाव आता हो

जब मार्केट ओपन होता है अपने डिमैट अकाउंट में सर्वप्रथम उन Stock Market में ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है Stock Market में ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है शेयर को खरीद लें और

यदि मान लीजिए आप ने प्रति शेयर ₹20 का खरीदा है इस शेयर की ट्रेडिंग के ऊपर आप 19.5 स्टॉप लॉस लगा दे और आपने अपना टारगेट प्राइस ₹121 रखा है

जैसे ही आप के शेयर में चढ़ाव आता है और यह अपने मूल्य अर्थात टारगेट प्राइस ₹121 को प्राप्त करता है तब यह अपने आप ही sell हो जाता है और आपका प्रॉफिट आपके ट्रेडिंग अकाउंट में आ जाता है

Scalping trading tips :- Scalping trading tips in Hindi

स्काल्पिंग ट्रेडिंग के अंतर्गत हमें हमारी पोजीशन को बहुत बड़ी रखनी होती है और मार्केट में मूवमेंट आने पर छोटे-छोटे प्रॉफिट निकालने पर ध्यान दिया जाता है

स्काल्पिंग ट्रेडिंग करने के लिए बहुत ही स्किल और एक्सपीरियंस की आवश्यकता होती है क्योंकि इसमें हमें बहुत ही हाई वोलेटाइल शेयर का चुनाव करना होता है हमारी एक गलती हमें नुकसान पहुंचा सकती है

Scalping trading tips in Hindi – चलिए जानते हैं कि स्केल्डिंग ट्रेडिंग करने के लिए हमें क्या क्या सावधानी बरतनी चाहिए और किस प्रकार हम इसके अंतिम ट्रेडिंग को अच्छी तरह से कर सकते हैं

  • स्काल्पिंग ट्रेडिंग करते समय पूर्ण मार्जिन मनी का उपयोग ना करें
  • स्काल्पिंग ट्रेडिंग करते समय हमें लालच से मुक्त रहना चाहिए और बड़े-बड़े टारगेट को सेट नहीं करना चाहिए
  • स्काल्पिंग ट्रेडिंग में स्टॉप लॉस का बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण स्थान होता है इसलिए हमें ट्रेडिंग करते समय स्टॉपलॉस का उपयोग अवश्य करना चाहिए
  • किसी भी अन्य ट्रेडर्स या व्यक्ति के बहकावे में आकर स्काल्पिंग ट्रेडिंग ना करें आप अपने स्किल एक्सपीरियंस और ट्रेडिंग अनुभव के आधार पर स्कैल्प ट्रेडिंग कर सकते हो
  • एक ही कंपनी के शेयर पर बार-बार ट्रेडिंग ना करें अपने पैसे को अलग-अलग कंपनी के शेयर पर लगा है जिससे कि आपको ज्यादा मुनाफा हो
  • 1 दिन में बहुत ही ज्यादा ट्रेडिंग ना करें ऑनलाइन की स्पेलिंग ट्रेडिंग करने वाले 1 से लेकर 100 ट्रेडिंग तक 1 दिन में कर सकते हैं यह अपनी-अपनी क्षमता पर निर्भर होता है
  • स्काल्पिंग ट्रेडिंग करने वाले 1 दिन में बहुत ज्यादा ट्रेडिंग कर लेते हैं इसलिए उन्हें अत्यधिक ब्रोकरेज चार्ज चुकाना होता है

Scalping Trading महत्वपूर्ण बिन्दु

Scalping Trading के अंदर पोजीशन साइज बड़ी रखनी होती है और छोटे प्रॉफिट निकालने पर ध्यान दिया जाता है जिसकी वजह से Risk To Reward Ratio और Money Management के नियमों का पालन करना मुश्किल हो जाता है अगर एक गलत ट्रेड हुआ तो बड़ा लोस्स हो सकता है।

स्काल्पिंग के लिए High Volatile Share चुने जाते है और स्काल्पिंग करने के लिए 1-5 Minute के Charts, Price Action, Chart Pattern और Trend line का उपयोग किया जाता है आम तौर पर इंडिकेटर का उपयोग नहीं किया जाता है।

Scalping Trading सबसे मुश्किल ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी में से एक है इसे करने के लिए बहुत ज्यादा Skill की Stock Market में ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है जरुरत होती है क्योंकि इसमें Quick Action की Required होती है शेयर को कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट में खरीदकर बेचना होता है।

Share Market में Scalping Trading में सफल होने के लिए बहुत ज्यादा अनुशासन की आवश्यकता होती है क्योंकि एक गलत ट्रेड बहुत सारे छोटे ट्रेड के प्रॉफिट को खत्म कर सकता है

स्काल्पिंग ट्रेडर एक दिन में 10 – 100 तक ट्रेड कर देते है जिस वजह से अपने ब्रोकर को बहुत सारी ब्रोकरेज चुकानी पड़ती है इसलिए एक Scalper को Right Time पर Right Trade लेना चाहिए और ब्रोकरेज बचाने का प्रयास करना चाहिए।

Stock Market Knowledge In Hindi स्टॉक और शेयर मार्केट में क्या अंतर है?

Stock और Share Market क्या अंतर है ज्यादातर लोग यही नहीं समझ पाते हैं. आइए जानते हैं स्टॉक मार्केट कैसे शेयर मार्केट से अलग है.

स्टॉक मार्केट नालेज

भले ही इन शब्दों को एक दूसरे के स्थान पर उपयोग किया जाता है, लेकिन वे अपने संचालन के तरीकों में भिन्नता होता है. अगर समानता की बात की जाए तो स्टॉक मार्केट एवं शेयर बाजार, एक ऐसा बाजार है जहां पर कंपनियां अपना शेयर जारी करता है और निवेशक उसे खरीद या बेच सकता है.

यह जानकारी निवेशकों को यह अनुमान लगाने में मदद कर सकती है कि भविष्य में शेयर बाजार कैसा Stock Market में ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है व्यवहार करेगा और शेयरों में निवेश करने या न करने के बारे में निर्णय ले सकता है।

अगर टेक्निकली देखा जाए तो जब कई शेयरों को एक साथ रखा जाता है, तो इसे स्टॉक कहा जाता है. एक कंपनी सीधे शेयर जारी कर सकती है, लेकिन वह इस तरह से स्टॉक जारी नहीं कर सकती है. याद रखिएगा की शेयर का मूल्य बहुत कम भी हो सकता है किंतु स्टॉक का मूल्य हमेशा ज्यादा होता है.

कंपनी के लाखों-करोड़ों शेयर को स्टॉक के तौर पर देखा जाता है, यही कारण है कि दुनिया के ज्यादातर शेयर मार्केट को स्टॉक एक्सचेंज के नाम से जाना जाता है. भारत मैं मुख्य रूप से दो स्टॉक एक्सचेंज है जिसका नाम नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और दूसरा नाम मुंबई स्टॉक एक्सचेंज है.

दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि शेयर मार्केट का सबसे बड़े प्लेटफार्म को स्टॉक एक्सचेंज कहा जाता है. जहां पर करोड़ों की संख्या में निवेशक निवेश करते हैं और कंपनियां अपना शेयर, स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से जारी करता है.

Stock Market Kaise Kam Karta Hai?

एक बार प्राइमरी शेयर (IPO) में नई प्रतिभूतियों के बेचे जाने के बाद, उनका सेकेंडरी शेयर बाजार में कारोबार किया जाता है. जहां एक निवेशक दूसरे निवेशक से मौजूदा बाजार मूल्य पर या जिस भी कीमत पर खरीदार और विक्रेता दोनों सहमत होते हैं, शेयर खरीदता है

सेकेंडरी शेयर बाजार या स्टॉक एक्सचेंज नियामक प्राधिकरण द्वारा नियंत्रित होते हैं। भारत में, प्राइमरी और सेकेंडरी बाजार भारतीय सुरक्षा और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा शासित होते हैं.

एक स्टॉक एक्सचेंज में स्टॉक ब्रोकरों को कंपनी के शेयरों और अन्य प्रतिभूतियों का व्यापार करने की सुविधा देता है. किसी स्टॉक को केवल तभी खरीदा या बेचा जा सकता है जब वह किसी एक्सचेंज में सूचीबद्ध हो.

इस प्रकार, यह स्टॉक खरीदारों और विक्रेताओं का मिलन स्थल है. भारत के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज हैं.

Stock Market Trading कैसे करते हैं?

जब कई शेयरों को एक साथ रखा जाता है, तो इसे स्टॉक कहते हैं. मार्केट वह प्लेस होता है, जहां पर शेयर या स्टॉक को बेचेया खरीदे जाते हैं. ट्रेडिंग का सीधा सा मतलब होता है कि मुनाफा लेकर के खरीद-फरोख्त करना होता है.

भारत में दो Stock Market मार्केट है जिसका नाम मुंबई स्टॉक एक्सचेंज है दूसरा नाम नेशनल स्टॉक एक्सचेंज है जहां पर आप ऑनलाइन Trading कर सकते हैं.

स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग कितने प्रकार के होते हैं? स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग मुख्य तौर पर तीन प्रकार से कर सकते हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है.

Intra-day Trading

इंट्राडे ट्रेडिंग एक प्रकार का स्टॉक या शेयर खरीदने और बेचने की प्रक्रिया है जो 1 दिन के ऑफिशियल आवर में पूरा कर लिया जाता है.

इंट्राडे ट्रेडिंग को ही सबसे ज्यादा लोग Stock Market में ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है पसंद करते हैं. हर लोग इन दिनों जल्दी पैसा कमाना चाहते हैं वह सुबह सुबह कुछ शेयर को खरीद करके 3:00 बजे से पहले बेच करके बड़ा मुनाफा कमाने के चक्कर में रहते हैं.

Scalper Trading

स्कैपर ट्रेडिंग एक प्रकार का ट्रेडिंग है जिसमें कुछ ही मिनटों में शेयर एवं स्टाफ खरीदे जाते हैं और उसे बेच भी दिए जाते हैं. शेयर खरीदने हैं और बेचने के समय में मुश्किल से 10 से 15 मिनटों का अंतर होता है.

शेयर मार्केट के बड़े-बड़े दिग्गज इस तरह के ट्रेडिंग करना पसंद करते हैं. इस प्रकार के ट्रेडिंग में तुरंत बहुत बड़ा फायदा होने के चांसेस होते हैं किंतु उतना ही चांस होता है कि इतना बड़ा नुकसान हो जाए. यही कारण है कि इस तरह के ट्रेडिंग में स्टॉक मार्केट के दिग्गज खिलाड़ी ही भाग लेते हैं.

Swing Trading

स्विंग ट्रेडिंग उस तरह के निवेशक के लिए सबसे अच्छा माना जाता है जो लंबे समय तक स्टॉक मार्केट में अपना निवेश रखना चाहते हैं. स्विंग ट्रेडिंग में देखा जाता है कि जिस कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड बहुत अच्छा होता है उसी कंपनी के शेयर में इस तरह का ट्रेडिंग किया जाता है.

निवेशक अपने खरीदे हुए शेयरों को लंबे समय तक अपने पास रखते हैं. जब शेयरों का कीमत बढ़ जाता है तभी निवेशक उसे बेचते हैं.

स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग करने का सही समय क्या होता है?

हमारे कुछ यूज़र पूछते हैं कि हमें शेयर कब खरीदना चाहिए और कब उसे बेच देना चाहिए? मेरा सीधा सा उत्तर होता है कि जब आपको शेयर सस्ता मिले तो उसे खरीद लीजिए. आपके द्वारा खरीदे गए शेयर का दाम अगर बढ़ जाता है तो उसे आप Stock Market में ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है बेच दीजिए.

मैंने खुद शेयर मार्केट के एक बड़े एक्सपर्ट से पूछा कि, आखिरकार हमें कैसे पता चलेगा कि सस्ते शेयर का दाम आने वाले समय में उनका दाम बढ़ जाएगा?

एक्सपर्ट का उत्तर – सस्ते शेयर का दाम बढ़ेगा या नहीं यह आपको तभी पता चलेगा जब आप उनके पिछले कुछ सालों का ट्रेंड देखेंगे और उस कंपनी के एनुअल रिपोर्ट का एनालिसिस करेंगे तभी आप सही आकलन Stock Market में ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है कर पाएंगे.

हमारे ज्यादातर यूजर यह सोचते हैं कि हम एक क्लिक से अपने डिमैट अकाउंट में शेर को खरीद लेते हैं और तुरंत ही एक दूसरे क्लिक पर उसे बेच देते हैं. मैं तो कहूंगा कि यह काम इतना आसान नहीं है.

स्टॉक मार्केट नॉलेज से संबंधित आर्टिकल को आपने पढ़ा होगा, जिससे आपको साफ साफ पता चल गया होगा कि आप शेयर या स्टॉक को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज एवं मुंबई स्टॉक एक्सचेंज से खरीद सकते हैं. जिसके लिए आप अपने डीमैट अकाउंट का इस्तेमाल कर सकते हैं.

कंपनी के एनुअल रिपोर्ट एवं शेयर के पिछले सालों के ट्रेंड को देख कर के Stock Market में ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है आप शेयर खरीदने का फैसला ले सकते हैं. मैं मानता हूं किसी भी कंपनी के एनुअल रिपोर्ट का एनालिसिस करने के लिए आपके पास 3 से 4 घंटे का समय होना चाहिए और आपको ज्ञान भी होना चाहिए.

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