निवेश रणनीति

एक सीमा आदेश क्या है?

एक सीमा आदेश क्या है?
सामान्‍यत: अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति पाने वाले व्‍यक्तियों पर पद तथा ग्रेड से संबंधित पात्रता की सभी शर्ते लागू की जाएं तथा उन्‍हें निर्धारित आयु तथा शैक्षिक योग्‍यता पूरी करनी होगी। तथापि, ऊपरी आयु-सीमा में छूट केसों की योग्‍यता के आधार पर की जा सकती है। सरकारी नौकरी में नियुक्ति के लिए निम्‍नतम आयु-सीमा 18 वर्ष है, इस संबंध में एक वर्ष की छूट के लिए महाप्रबंधक का अनुमोदन अपेक्षित है। निम्‍नतम आयु-सीमा में एक वर्ष से कम के लिए छूट हेतु रेल मंत्रालय की मंजूरी अत्‍यावश्‍यक है।

स्कूल निलंबन के बारे में आपको क्या जानना चाहिए

एक बच्चे को कुछ ऐसे आचरण के लिए निलंबित किया जा सकता है जो NYC शिक्षा विभाग की अनुशासन संहिता का उल्लंघन करता है, उपलब्ध है यहाँ उत्पन्न करें.

NYC में दो प्रकार के निलंबन हैं: एक प्रिंसिपल का निलंबन और एक अधीक्षक का निलंबन।

प्राचार्य का निलंबन क्या है?

अनुशासन संहिता में उल्लिखित कुछ व्यवहार के लिए एक प्रिंसिपल एक छात्र को निलंबित कर सकता है। प्रिंसिपल को निलंबन की लिखित सूचना माता-पिता को देनी होगी और पांच दिनों के भीतर माता-पिता के साथ एक सम्मेलन की व्यवस्था करनी होगी। इस सम्मेलन में माता-पिता गवाहों से पूछताछ कर सकते हैं और दस्तावेज और अन्य सबूत प्रदान कर सकते हैं। निलंबन उचित है या नहीं, यह प्राचार्य तय करेंगे। एक प्रिंसिपल का निलंबन 1-5 दिनों तक चल सकता है। एक छात्र के स्थायी रिकॉर्ड पर प्रिंसिपल के निलंबन का उल्लेख नहीं किया जाता है।

अनुशासन संहिता में उल्लिखित गंभीर व्यवहारों के लिए एक स्कूल अधीक्षक के निलंबन की मांग कर सकता है। अधीक्षक का निलंबन प्राप्त करने वाले छात्र एक सुनवाई अधिकारी के समक्ष पूर्ण सुनवाई के हकदार हैं। स्थिति की गंभीरता के आधार पर अधीक्षक का निलंबन 6-10 दिन, 11-29 दिन, 30-59 दिन, 60-90 दिन या एक वर्ष तक चल सकता है। 17 वर्ष से अधिक उम्र के छात्र को स्कूल से भी निकाला जा सकता है। एक अधीक्षक का निलंबन छात्र के स्थायी रिकॉर्ड में दर्ज है। हालांकि, एक सुनवाई अधिकारी आदेश दे सकता है कि भविष्य में एक बार निलंबन को हटा दिया जाए (रिकॉर्ड से हटा दिया जाए)।

एक अधीक्षक के निलंबन की सुनवाई में शामिल कदम क्या हैं?

  • नोटिस: स्कूल को निलंबन के बारे में लिखित रूप में माता-पिता को तुरंत सूचित करना चाहिए। नोटिस में निलंबन का कारण, निलंबन की सुनवाई की तारीख और बच्चे को वैकल्पिक स्कूल में शामिल होना चाहिए।
  • निलंबन पैकेट: माता-पिता को स्कूल से "निलंबन पैकेट" की एक प्रति का अनुरोध करना चाहिए। पैकेट में सभी गवाहों के बयानों, घटना की रिपोर्ट और किसी भी अन्य सबूत की प्रतियां हैं जो स्कूल निलंबन की सुनवाई में पेश करेगा। इसमें छात्र के शैक्षिक और उपस्थिति रिकॉर्ड भी शामिल हैं।
  • पूर्व सुनवाई सम्मेलन: सुनवाई के दिन माता-पिता और छात्र के साथ एक पूर्व सुनवाई सम्मेलन होगा। माता-पिता को यह तय करना होगा कि कैसे आगे बढ़ना है:
    • कानूनी प्रतिनिधित्व प्राप्त करने या सबूत इकट्ठा करने के लिए माता-पिता स्थगन का अनुरोध कर सकते हैं।
    • माता-पिता "कोई प्रतियोगिता याचिका नहीं" दर्ज कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि छात्र आरोपों को स्वीकार या अस्वीकार नहीं करता है, लेकिन सुनवाई के अधिकार को छोड़ने और अधीक्षक द्वारा लगाए गए परिणामों को स्वीकार करने के लिए तैयार है। सुनवाई की तारीख से पहले टेलीफोन द्वारा "कोई प्रतियोगिता याचिका" भी दर्ज नहीं की जा सकती है।
    • माता-पिता पूर्ण सुनवाई का अनुरोध कर सकते हैं।

    क्या निलंबन के दौरान छात्र को शैक्षिक सेवाएं प्राप्त होंगी?

    हां। निलंबन के लिए छात्रों को अकादमिक रूप से दंडित नहीं किया जा सकता है। स्कूल को निलंबन के दौरान छात्र को वैकल्पिक निर्देश प्राप्त करने की व्यवस्था करनी चाहिए और उन्हें परीक्षा देने और आवश्यक स्कूलवर्क पूरा करने का अवसर प्रदान किया जाना चाहिए। मिडिल स्कूल और हाई स्कूल के छात्र आमतौर पर अपने निलंबन के दौरान वैकल्पिक शिक्षण केंद्र (एएलसी) में स्कूल जाते हैं।

    विकलांग व्यक्ति शिक्षा अधिनियम (आईडीईए) विकलांग छात्रों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है। यदि किसी विकलांग छात्र को लगातार 10 दिनों से अधिक समय तक निलंबित किया जाता है, या यदि छोटे निलंबन का एक पैटर्न है जो कुल 10 दिनों से अधिक है, तो छात्र "अभिव्यक्ति निर्धारण समीक्षा" (एमडीआर) का हकदार है। एमडीआर में, माता-पिता सहित स्कूल की विशेष शिक्षा समिति के सदस्य तय करेंगे कि क्या व्यवहार:

    एक सीमा आदेश क्या है?

    अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति हेतु घटना के घटित होने की तिथि से नियुक्ति के लिए पात्र व्‍यक्ति को दी जाने वाली सामान्‍य समय-सीमा 5 वर्ष है।

    अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति हेतु सक्षम प्राधिकारी द्वारा 5 वर्ष की अवधि में छूट दी जा सकती है, बशर्ते की निम्‍नलिखित बातें शामिल हों -

    3. अनुकंपा के आधार पर दी जाने वाली नियुक्ति किसी भी समय, परिवार के किसी अन्‍य सदस्‍य को नहीं दी गई हो ।

    अनुकंपा के आधार पर रोज़गार का प्रस्‍ताव देना कोई सामान्‍य बात नहीं है। अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के अनुरोध पर विचार करते समय मृतक के परिवार की वित्‍तीय स्थिति को भी ध्‍यान में रखा जाता है क्‍योंकि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देने का उद्देश्‍य शोक-संतप्‍त परिवार को वित्‍तीय संकट से उभारने के लिए तुरंत वित्‍तीय सहायता देना है। प्रशासन के लिए यह आवश्‍यक नहीं है कि वह अनुकंपा के आधार पर दी जाने वाली नियुक्ति उम्‍मीदवार की शैक्षिक योग्‍यता या मृतक कर्मचारी की हैसियत के आधार पर दें।

    नौकरी की अधिकतम आयु सीमा अगले आदेश तक प्रभावी

    समस्तीपुर : राज्य सरकार की नौकरियों के लिए विभिन्न कोटि के लिए निर्धारित अधिकतम उम्र सीमा की अवधि 31 दिसंबर 2015 को ही समाप्त हो चुकी थी. लेकिन अब इस अवधि का विस्तार अगले आदेश तक एक सीमा आदेश क्या है? के लिए कर दिया गया है. जिस कारण अब अगले आदेश तक राज्य सरकार की नौकरियों के लिए विभिन्न कोटि के लिए निर्धारित अधिकतम उम्र सीमा प्रभावी रहेगा. इस संबंध में सूबे के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा संकल्प जारी कर दिया गया है.

    लिहाजा अब राज्य सरकार की सेवाओं, संवर्गों व पदों पर सीधी भर्ती के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा की वैधता तिथि अगले आदेश तक प्रभावी हो गया है. जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की सेवाओं, संवर्गों व पदों पर सीधी भर्ती के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में वर्ष 2006 में संशोधन किया गया था.

    राज्यों को आरक्षण पर आदेश नहीं दे सकते हाई कोर्ट, क्यों SC ने अदालतों को एक सीमा आदेश क्या है? याद दिलाई उनकी सीमा

    राज्यों को आरक्षण पर आदेश नहीं दे सकते हाई कोर्ट, क्यों SC ने अदालतों को याद दिलाई उनकी सीमा

    उच्च न्यायालयों की ओर से राज्य सरकारों को आरक्षण को लेकर कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता है। यह नीतिगत फैसले हैं, जो राज्य सरकार के ही दायरे में आते हैं और उनमें अदालतों को दखल नहीं देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आरक्षण से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की ओर से अगस्त 2019 में दिए गए फैसले को भी खारिज कर दिया। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि पंजाब सरकार को सरकारी मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों में 3 फीसदी सीटें खेल कोटे के तहत आरक्षित करनी चाहिए।

    असम-मेघालय सीमा पर तनाव बरकरार, न्यायिक जांच का आदेश

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    मेघालय में असम नंबर वाले कई वाहनों में बुधवार को आग लगा दी गई। मेघालय-असम सीमा पर बुधवार को भी तनाव कायम है। मंगलवार की घटना को लेकर असम के सीएम ने न्यायिक जांच का आदेश दिया है। दोनों राज्यों के बॉर्डर पर मंगलवार को एक गांव में असम पुलिस की फायरिंग के दौरान मेघालय के 6 लोग मारे गए थे। घटना में असम का एक वन रक्षक भी मारा गया था।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने न्यायिक जांच की घोषणा की है। सरमा ने कहा कि मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया है। एसपी का तबादला कर दिया गया है और स्थानीय पुलिस और वन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। मेघालय के पूर्व सीएम मुकुल संगमा ने इस घटना को नरसंहार बताया है।

    वाहनों पर रोक

    न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए, असम पुलिस ने सीमा पर विभिन्न क्षेत्रों में बैरिकेड्स लगा दिए हैं। मेघालय नंबर वाली गाड़ियों को छोड़कर बाकी वाहनों यानी असम के नंबर वाली गाड़ियों को मेघालय में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। झड़प के बाद, असम एक सीमा आदेश क्या है? सरकार ने भी गोलीबारी की घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये देने की घोषणा की।

    खबर है कि सिलचर और कुछ अन्य शहरों में असम नंबर वाले वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। मीडिया रपटों में अभी तक सिलचर में हुई घटना की ही पुष्टि की गई है। काफी लोग होटलों में फंसे हुए हैं। उन्हें डर है कि एक सीमा आदेश क्या है? बाहर निकलने पर असम का निवासी होने के कारण उन पर हमले हो सकते हैं।

    इस बीच, मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा और उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन टाइंगसोंग अन्य मंत्रियों के साथ मुकरोह गांव जाएंगे, जहां मंगलवार को घटना हुई है। वे मारे गए नागरिकों के परिवारों से मिलेंगे।

    क्यों हुई घटना

    इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मंगलवार की घटना लकड़ी की तस्करी को लेकर हुई है। असम वन विभाग की टीम ने मंगलवार सुबह करीब 3 बजे पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले के मोइकरांग में मेघालय सीमा पर ट्रक को रोका। ट्रक ने भागने की कोशिश की। उसका पीछा किया गया। असम के वन रक्षकों ने फिर वाहन पर गोलियां चलाईं और एक टायर पंचर कर दिया। तीन लोगों - ट्रक ड्राइवर, हेल्पर और एक अन्य व्यक्ति को पकड़ लिया गया और वन रक्षक उन्हें जिरीकाइंडिंग लाये। वन रक्षकों ने घटना की जानकारी जिरीकिंडिंग पुलिस थाने को दी और अतिरिक्त बल की मांग की।

    पीटीआई ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया एक सीमा आदेश क्या है? कि भारी संख्या में मेघालय के लोग हथियारों से लैस होकर सुबह करीब 5 बजे मौके पर जमा हो गए। मौके पर पहुंचकर पुलिस टीम को आत्मरक्षा में फायरिंग करनी पड़ी, जिससे वन रक्षक समेत छह लोगों की मौत हो गयी। मृतक वन रक्षक की पहचान बिद्या सिंह लेहटे के रूप में हुई है, जबकि एक अन्य वन रक्षक अभिमन्यु इस घटना में घायल हो गया।

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